ऋतुचर्या के अनुसार हमारे रहन सहन, खान पान का विशेष ध्यान रखना अति अनिवार्य : कर्नल विवेक शर्मा

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मानव जीवन में प्रकृतिक ऋतु परिवर्तन का विशेष महत्व

चंड़ीगढ़/मोगा  (कैप्टन सुभाष चंद्र शर्मा) प्रकृति ने हमारा जीवन मंगलमय बनाने हेतु ऋतु परिवर्तन की रचना की है जैसे कि बसंत (ऋतुराजा), ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत एवं शिशिर इत्यादि।प्रकृति समय समय पर मौसमनुसार सभी प्राणियों के लिए वनस्पति, खाने पीने हेतु सब्जियाँ फल इत्यादि का उत्पादन कर रही है ,जो कि हमारे स्वास्थ्य हेतु प्रकृतिक उपहार हैं। प्रकृति के अनुकूल चलना मानव जीवन के साथ खिलवाड़ सिद्ध हो रहा है।

श्रावण – भाद्रपद मास में वर्षा ऋतु का आगमन हो चुका है। हमारी टीम ने इस मौसम के बारे विस्तृत जानकारी लेने हेतु कर्नल विवेक कुमार शर्मा (सेवानिवृत्त) से संपर्क किया। उन्होंने वर्षा ऋतु में अपने स्वास्थ्य को सही रखने हेतु बहुत ही विस्तार से जानकारी सांझी की। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद ग्रंथोंनुसार हमें वर्षा ऋतु में हल्का भोजन करना चाहिए जैसे पुराने जौ,गेंहू, काला नमक मूंग का सूप, शहद एवं अन्य सुपाच्य पदार्थों का सेवन करें (चरक सहिंता/ अष्टांगहृदय) सौंफ काली मिर्च तेजपता, परवल, तोरी, बैंगन, सहजन, मूंग दाल, नींबू करेला, पूदीना, आंवला एवं तुलसी का सेवन लाभदायक है। पहले का खाया हुआ पच जाने पर ही खुल कर भूख लगे एवं शरीर में हल्कापन महसूस हो तभी दूसरा भोजन करें। गर्म करके ठंडा एवं गुनगुने पानी का ही सेवन करें (अष्टांगहृदय/ चरक संहिता) सूखे स्थान पर रहें, घर में नमी का ध्यान रखें। हलके सूती वस्त्र पहने। सफेद वस्त्र विशेष लाभान्वित होंगे। हरी पत्तेदार सब्जियाँ पालक,पत्ता गोभी,मेथीइत्यादि पचने में भारी, वातवर्धक एवं बासी पदार्थ बिलकुल सेवन न करें। उड़द दाल,चना, अरहर,मैदा मिठाई शीतल पेय इत्यादि का सेवन न करें। स्नान के बाद या बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े न पहने। देर रात को भोजन न करें। वर्षा ऋतु में जानलेवा संक्रमित रोगों से बचाव अति अनिवार्य है। इस मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें से एक है डेंगू। डेंगू के लक्षणों में जोड़ों का दर्द,थकान,सिर दर्द उल्टी दस्त एवं प्लेट्स सैल तेजी से कम हो जाते हैं। रोगी को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। मलेरिया उल्टी दस्त इत्यादि रोगों से बचाव हेतु हमें उचित खान पान, रहन सहन, साफ सफाई एवं मच्छरों से बचाव हेतु पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी को कोई शरीरिक कष्ट महसूस हो तो अच्छे चिकित्सक से इलाज करवाना चाहिए, लापरवाही बिल्कुल नहीं करना चाहिए। हमारी छोटी सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। शेष वर्षा ऋतु में धरती माता बहुत ही प्रसन्न होती है, बुजुर्गो के अनुसार इस मौसम में सूखी चीज भी धरती माता की गोद में हरी हो जाती है। पर्यावरण के संरक्षण हेतु पेड़ पौधो का रोपण अति लाभान्वित है। हमें खुले स्थानों पर अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगा कर वर्षा ऋतु का लाभ लेना चाहिए।अपने स्वार्थ हेतु हमें प्रकृति के अनुकूल कोई कार्य नहीं करना चाहिए। वर्षा ऋतु के बारे बहुत ही सरल ढंग से विस्तार पूर्वक जानकरी देने हेतु न्यूज टीम ने कर्नल साहब का आभार व्यक्त किया।

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