दूसरों के संपत्ति पर अनाधिकृत कब्जा कर मालिक पर ही फर्जी मुकद्दमा कर कोर्ट को धोखे में रखने वाले हो जाएं सावधान :दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने संपत्ति का झूठा मुकदमा दायर करने वाले व्यक्ति पर लगाया लाखों का जुर्माना

भाई पर किया था संपत्ति विवाद का फर्जी मुकदमा, कोर्ट ने लगाया लाखों का जुर्माना 

एडीशनल सीनियर सिविल जज किशोर कुमार ने वादी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा भी है कि गलत दावा करने के लिए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज क्यों ना की जाए।

दिल्ली : अभय कांत मिश्रा (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया) यहां एक व्यक्ति द्वारा अपने भाई के खिलाफ कथित रूप से संपत्ति विवाद में फर्जी आरोप लगाने पर कोर्ट ने उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे दावे करके न्याय व्यवस्था को दूषित करने की इजाजत दी गई तो यह बड़ी आपदा होगी। एडीशनल सीनियर सिविल जज किशोर कुमार ने शिकायतकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा भी है कि गलत दावा करने के लिए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज क्यों ना की जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने कोर्ट की कार्यवाही का गलत फायदा उठाया है और ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना चाहिए।

शिकायतकर्ता ने यह दावा करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी कि 1989 में उसके पिता के निधन के बाद हिस्सेदारों में मौखिक रूप से जायदाद का बंटवारा किया गया था। दिल्ली के मोती नगर क्षेत्र में स्थित संपत्ति उनकी मां के नाम पर हुई थी और तय हुआ था कि उनके निधन के बाद यह संपत्ति उस व्यक्ति के नाम हो जाएगी। उसने आरोप लगाया कि 2017 में मां के निधन के बाद उसके भाई ने वह संपत्ति खाली करने से मना कर दिया और एक साल बाद उसे पता चला कि उसका भाई दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह जमीन अपने नाम करने की कोशिश कर रहा है।

मुकदमा खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि वादी ने कोर्ट में बिल्कुल फर्जी मुकदमा दर्ज कराया है जब उसने दावा किया कि उसके पिता के निधन के बाद मौखिक बंटवारा हुआ है तो इसके अनुसार, जिस संपत्ति पर मुकदमा हुआ वह उसके हिस्से में आई।

न्यायाधीश ने कहा, “ अदालत में झूठे मुकदमे करने का मकसद कानून पर हमला करना है और कोई भी अदालत ऐसे कदम को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती, जिसमें न्यायिक संस्थान में लोगों के विश्वास को हिलाने की प्रवृत्ति हो। अगर इस तरह के दावे दायर करके न्याय व्यवस्था को दूषित करने की इजाजत दी गई तो यह बड़ी सार्वजनिक आपदा होगी।
सिविल न्यायाधीश ने 11 अक्तूबर के आदेश में कहा कि झूठे और फर्जी याचिकाओं पर आधारित मुकदमे के बारे में वादी और उनके वकील को अच्छी तरह पता था। इन पर दो लाख रुपये जुर्माना लगाने के साथ इस मुकदमे को खारिज किया जाता है। उन्होंने वादी को एक लाख रुपये जिला विधि सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) में 50,000 रुपये भाई (प्रतिवादी) को और 50,000 रुपये दिल्ली शहरी सुधार बोर्ड में जमा कराने के निर्देश दिए।

मुकदमे के जवाब में वादी के भाई ने कहा कि उनकी मां ने दो सितंबर 2000 को यह संपत्ति उन्हें बेच दी थी और उनका निधन 2005 को हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वादी ने यह पूरी कहानी बनाई है।

अभय कांत मिश्रा (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया)

 

 

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