गौ संरक्षण एवं रोजगार ढूंढने वालों के लिए सुनैहरी अवसर


गौ संरक्षण एवं रोजगार ढूंढने वालों के लिए सुनैहरी अवसर : दरगेश शर्मा

मोगा : [कैप्टन सुभाष चंद्र शर्मा ब्यूरो चीफ ] :

दरगेश शर्मा, पूर्व उप चेयरमैन गऊ सेवा कमीशन [पंजाब] ने प्रेस वार्ता में बताया कि :

👉केंद्र सरकार की ओर से 21 फरवरी 19 को राष्ट्रीय कामधेनू आयोग का गठन हुआ। जिसका मुख्य उद्देश्य देसी नसल की गायों एव उनकी संतति की सुरक्षा एवं संरक्षण है।आयोग के निर्देशों के अनुसार छोटे एवं बड़े किसानों,युवाओं महिलाओं की अजिवका सृजन पर अधिक से अधिक जोर दिया गया है।राष्ट्रीय कामधेनू आयोग गायों की आर्थिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण महत्व को लोगों तक पहुँचाने हेतु सफल रहा।

दरगेश शर्मा पूर्व उप चेयरमैन गऊ सेवा कमीशन [पंजाब]
👉उन्होंने बताया कि दूध के अतिरिक्त गोमय एवं गौमूत्र जो कि सुलभ एवं पर्यावरण के अनुकूल हैं।इस प्रकार उनका उपयोग धन कमाने एवं व्यवहारिक उपयोग करके आर्थिक गति में सचारू प्रयोग किया जा सकता है। राष्ट्रीय कामधेनू आयोग द्वारा चलाए गए।

👉इस अभियान के अंतर्गत गौमय गणेश, कामधेनू दीपावली,कामधेनू देव दीपावली मनाने हेतु सैमिनार ,वेविनार ,
प्रशिक्षण श्रृंखलाओं के माध्यम से गौमय एवं गौमुत्र की महत्ता जन जन तक पहुँचाने हेतु कार्य चल रहा है। देसी नसल की गायों एवं उनकी संतति का संरक्षण एवं सुरक्षा कार्य उच्च स्तर पर हो रहा है ।

👉राष्ट्रीय कामधेनू आयोग द्वारा दिए निर्देशों का पालन करते प्रदेश की गौशालों में गोमय,गौमूत्र इत्यादि का उचित उपयोग करके दीपक एवं गणेश जी इत्यादि बनाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। उच्च पदाधिकारियों,गणमान्य धार्मिक/समाजिक संगठनों एवं अखबारों के माध्यम से लोगों में जागृति हो रही है। प्रदेश में गौमय गणेश जी एवं दीपक उच्च पदाधिकारियों एवं गणमान्यों को भेंट भी किए गए।

👉देसी नसल की कामधेनू गाय का दूध तो उपयोगी है परंतु धार्मिक एवं आयुर्वेद के अनुसार गौमय एवं गौमुत्र भी स्वास्थ्य के लिए अति लाभप्रद है। शर्मा ने कहा कि कामधेनू देसी नसल की गऊ को अधिक से अधिक पाला जाए जो कि स्वास्थ्य ,पर्यावरण एवं इसका गोमय एवं गौमुत्र धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी अति पवित्र माना गया है।

राष्ट्रीय कामधेनू आयोग के चेयरमैन,पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डा: बल्लभ भाई कठेरिया

👉 राष्ट्रीय कामधेनू आयोग के चेयरमैन,पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डा: बल्लभ भाई कठेरिया के अनुसार विश्व विद्यालयों में “कामधेनू चेयर” की स्थापना भी शुरू हो गई है।देसी गाओं की महत्ता को जन मानस तक पहुँचाने हेतु हर उचित प्रयास किए जा रहे हैं।

👉कामधेनू देसी नसल गऊ के बारे लोगों को जागरूक/प्रेरित करने हेतु आयोग की ओर से निःशुल्क परीक्षा का भी अयोजन किया जा रहा है। आयोग के माननीय अध्यक्ष ने बताया कि कामधेनू गऊ विज्ञान प्रसार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी राष्ट्रीय कामधेनू आयोग की वेबसाइट kamdhenu.gov.in एवं kamdhenu.blog एवं सोशल मीडिया पर जारी की जाएगी। परीक्षा में 8वीं से 12वीं के बच्चे भाग ला सकते हैं परीक्षा निःशुल्क है।परीक्षा क्षेत्रीय,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं में होगी। परीक्षा अध्ययन पाठ्यक्रम समग्री इत्यादि सुविधाएँ आनलाईन उपलब्ध होंगी।

👉डा: कठेरिया के अनुसार यह परीक्षा भविष्य में वार्षिक होगी एवं इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने उपरांत पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र दिए जाएँगे। यह हरित भारत,डिजिटल भारत,स्वच्छ भारत आदि माननीय प्रधान मंत्री महोदय के अवधारणाओं के अनुरूप आत्म निर्भर भारत के उद्देश्यों को भी परिपूर्ण करेगा।

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