सामान्य वर्ग के 34 लोगों की बर्बर हत्या के आरोपियों को पटना पुलिस ने किया रिहा

वाराणसी/पटना (विशेष सवांदाता/सौजन्य से : अधिवक्ता अभय कांत मिश्रा) सामान्य वर्ग के 34 लोगों की बर्बर हत्या के आरोपियों को पटना हाई कोर्ट ने किया रिहा, घर से निकाल कर काटे गए थे गले।।

कहा जाता है कि, रक्त रंजित का ऐसा दृश्य था कि गाँव के पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार पद्मनारायण सिंह जब अपने सेनारी गांव पहुंचे तो अपने परिवार के 8 लोगों की फाड़ी हुई लाशें देखकर उनको दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।

 

बिहार के जहानाबाद जिले के सेनारी गांव में 22 साल पहले हुए 34 भूमिहारों के क्रूरतम नरसंहार पर फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए 15 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सेनारी समेत आसपास के गाँवों में भारी निराशा और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि क्या 34 लोगों की गला रेतकर, और पेट चीरकर हत्या किसी ने भी नहीं की थी। साथ ही लोगों की मांग है कि सरकार आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करे।

क्या हुआ था 18 मार्च 1999 को

 

22 साल पहले 18 मार्च 1999 को दिल्ली में वाजपेयी सरकार अपना एक साल पूरा होने का जश्न मना रही थी। उसी रात बिहार के सेनारी गांव में 500-600 एमसीसी (माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर) के लोग घुसे। सेनारी गांव में 300 घर थे जिसमे 70 भूमिहार परिवार रहते थें। हथियारों के साथ घुसे एमसीसी के अपराधियों ने गाँव को चारों ओर से घेर कर घरों से खींच-खींच के मर्दों को बाहर किया गया। FIR के मुताबिक इस घटना को शाम 7.30 से रात 11 बजे के बीच में अंजाम दिया गया था। वहीं पुलिस को नरसंहार की सुचना 11:40 मिनट पर प्राप्त हुई थी।

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भूमिहार समाज के कुल 40 लोगों को चुनकर उन्हें गांव से बाहर ठाकुरबाड़ी मंदिर के पास ले गए। जहाँ उनकी बड़ी ही क्रूरता के साथ 34 लोगों की गला और पेट चीर कर हत्या कर दी गयी जबकि 6 लोगों को वही तड़पता हुआ छोड़ दिया गया था। घटना की FIR नरसंघार में जान गवा चुके अवध किशोर शर्मा की पत्नी चिंतामणि देवी ने लिखाई थी। जिसमे अन्य पीड़ितों के बयानों को भी शामिल किया गया था। घटना की विवेचना करते हुए स्थानीय पुलिस ने 15 नामजद व अन्य आरोपियों पर IPC 147, 148, 149, 324, 307, 302, 452, 380, 120-B, आर्म्स एक्ट, 3/4 एक्सप्लोसिव सब्सटांसिस एक्ट के तहत FIR दर्ज की थी।

 

निचली अदालत ने 74 आरोपियों में से 15 को सुनाई थी सजा

जहानाबाद सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार सिंह ने इस नरसंहार के 15 आरोपियों को 15 नवंबर 2016 को सजा सुनाई थी। जिसमे 11 आरोपियों को मौत व अन्य को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी। जिला न्यायलय ने बुधन यादव, बचेश कुमार, बुटाई यादव, सतेंद्र दास, ललन पासी, द्वारिक पासवान, करीमन पासवान, गोराई पासवान, उमा पासवान व गोपाल साओ को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि 74 आरोपियों में से तब भी साक्ष्य के अभाव में 23 अन्य को बरी कर दिया था। जबकि कुछ की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।

पटना हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए यह भी कहा कि इस कांड में अभियोजन और पुलिस प्रशासन भी आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा है। पटना हाई कोर्ट ने रात के अंधेरे में आरोपियों की पहचान किए जाने पर सवाल उठाते हुए अपना निर्णय दिया है। अदालत ने घटना को तो सही माना है, किन्तु आरोपियों की पहचान को सही नहीं माना है।

 

सेनारी काण्ड के पीड़ितों के परिजनों ने कोर्ट के निर्णय पर असहमति जताई है। कोर्ट भले ही साक्ष्य के अभाव की बात कर रहा है किन्तु इस नरसंहार में उनके परिजनों के कटे हुए सिर से बढ़कर क्या सबूत हो सकता है ? सेनारी नरसंहार का नाम सुनकर आज भी पुरे इलाके के लोगों की रूह काँप उठती है। किन्तु आज 22 साल बाद सभी आरोपियों को साक्ष्य के आभाव में बरी किया जाना उनके जख्मों पर नमक रगड़ने के समान है।

 

इस नृशंश हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट द्वारा सुनाये गए फैसले से लोगों में काफी निराशा है। मृतक के परिजनों का कहना है कि सरकार फैसले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करे जिससे उन्हें न्याय मिल सकें।
हमारा भी मानना है कि बिहार सरकार द्वारा इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में जरूर चुनौती दिया जाना चाहिये।

 

 

आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति द्वारा बिहार सरकार से यह मांग किया जाता है कि बिहार सरकार इस नृशंश हत्याकांड में पटना हाइकोर्ट द्वारा दिये गए फैसला के खिलाफ जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दे ताकि दोषियों को सजा और पीड़ितों को न्याय मिल सके।।साथ ही आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति के लीगल टीम द्वारा पीड़ितों के तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में यह मुकदमा मुफ्त में लड़ने का फ़ैसला लिया गया है।।

आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि हमेशा की तरह आप सभी का पूर्ण रूप से साथ समर्थन और आशीर्वाद रहेगा।

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