पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड विद्यार्थियों से परीक्षा के नाम पर ले चुकी लगभग रु 83 करोड़, नही ली परीक्षा

पंजाब, मोहाली /होशियारपुर (ज्योत्सना विज) पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों की बिना परीक्षा दिए ही लगभग रु83 करोड रुपए कमा लिए गए हैं। शायद यह पहला उदाहरण है कि बच्चों ने पेपर भी नहीं दिए लेकिन उनसे परीक्षा शुल्क के नाम पर लिए गए पैसे को लेकर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड रुपए दान किए बैठा है। प्रदेश में दसवीं की कक्षा के विद्यार्थियों से 11 सो रुपए प्रति विद्यार्थी के हिसाब से 36 करोड रुपए से अधिक की राशि इकट्ठे की गई, इसी तरह 12वीं के विद्यार्थियों से पंद्रह 15 सो रुपए प्रति विद्यार्थी के हिसाब से रु 47 करोड़ से अधिक की राशि इकट्ठी की गई जो कुल मिलाकर 83 करोड़ से अधिक की बनती है। इस राशि में से बच्चों को पेपर प्रिंट करवा कर देने के अलावा उनकी मार्किंग तथा परीक्षा में तैनात किए जाने वाले स्टाफ का मेहनताना दिया जाना था। कोरोनावायरस के चलते जब पेपर ही नहीं हुए तो फिर बोर्ड का 1 भी रुपए खर्च नहीं हुआ।

ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि क्या अब विद्यार्थियों के पैसे बोर्ड वापस करेगा अगर नहीं करेगा तो फिर वह 83 करोड रुपया कहां जाएगा। ये सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का मामला तो नहीं बन जाएगा ? क्योंकि कहा जाता है कि एक बार जो पैसा सरकार के खजाने में चला जाए फिर वह वापस नहीं आता। इसके अलावा बोर्ड में पांचवी और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों से भी परीक्षा शुल्क के नाम पर कुछ ना कुछ पैसा इकट्ठा किया है उसका भी हिसाब कौन देगा। ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस तो शिक्षा बोर्ड के लिए कमाऊ साधन बनकर आ गया है। बोर्ड ने पिछले साल भी विद्यार्थियों की परीक्षा नहीं ली थी सिर्फ कुछ पेपर ही हुए थे। मार्किंग तथा शिक्षकों को दिया जाने वाला शुल्क भी बचा लिया लगता है ! करोना के चलते बोर्ड अब अमीर हो गया है। बोर्ड के अधिकारी गरीब बच्चों के पैसे वापस करने के बारे में अपना मुंह नहीं खोल रहे हैं, लेकिन अगर कोई बच्चा देरी से परीक्षा शुल्क देता है तो उससे भारी-भरकम जुर्माना वसूल किया जाता है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाएगी तथा बड़ी-बड़ी बातें करने वाले शिक्षा मंत्री क्या कदम उठाएंगे यह तो अगले जन्म में देखने वाली बात होगी !

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