श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग दर्शन दौरान घंटा सुनाता है गौरवशाली इतिहास की गाथा !

दिल्ही/ उत्तर प्रदेश/वाराणसी/भोरगिरी (सहयोगी अधिवक्ता अभय कांत मिश्रा के साथ विशेष सवांदाता) एजागरण 24×7 न्यूज की टीम ने इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्टस के साथ मिल कर, भारत के छुपाए गए गौरवशाली इतिहास की खोज की मुहिम चलाई है। इसी कड़ी के तहत एजागरण की टीम श्री भीमाशंकर मंदिर में दर्शनों हेतु पहुंची। जहां कुछ ऐसे तथ्य सामने लाए गए जो भारत के गौरवशाली इतिहास की गाथा गाते हैं।

श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर

भीमाशंकर मंदिर भोरगिरि गांव खेड़ से 50 कि.मि. उत्तर-पश्चिम पुणे से 110 कि.मि में स्थित है। यह पश्चिमी घाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। यहीं से भीमा नदी भी निकलती है। यह दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है। यहां भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है।

 

शिवपुराण में श्री भीमाशंकर मंदिर का इतिहास

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवपुराण में मिलता है। शिवपुराण में कहा गया है कि पुराने समय में कुंभकर्ण का पुत्र भीम नाम का एक राक्षस था। उसका जन्म ठीक उसके पिता की मृ्त्यु के बाद हुआ था। अपनी पिता की मृ्त्यु भगवान राम के हाथों होने की घटना की उसे जानकारी नहीं थी। बाद में अपनी माता से इस घटना की जानकारी हुई तो वह श्री भगवान राम का वध करने के लिए आतुर हो गया। अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसने अनेक वषरें तक कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर उसे ब्रह्मा जी ने विजयी होने का वरदान दिया। वरदान पाने के बाद राक्षस निरंकुश हो गया। उससे मनुष्यों के साथ साथ देवी-देवता भी भयभीत रहने लगे। धीरे-धीरे सभी जगह उसके आंतक की चर्चा होने लगी। युद्ध में उसने देवताओं को भी परास्त करना प्रारंभ कर दिया। उसने सभी तरह के पूजा पाठ बंद करवा दिए। अत्यंत परेशान होने के बाद सभी देव भगवान शिव की शरण में गए। भगवान शिव ने सभी को आश्वासन दिलाया कि वे इस का उपाय निकालेंगे। भगवान शिव ने राक्षस तानाशाह भीम से युद्ध करने की ठानी। लड़ाई में भगवान शिव ने दुष्ट राक्षस को राख कर दिया और इस तरह अत्याचार की कहानी का अंत हुआ। भगवान शिव से सभी देवों ने आग्रह किया कि वे इसी स्थान पर शिवलिंग रूप में विराजित हो़। उनकी इस प्रार्थना को भगवान शिव ने स्वीकार किया और वे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में आज भी यहां विराजित हैं।

 

18वी. सदी में नाना फडणवीस द्वारा बनाया गया मंदिर का शिखर

भीमाशंकर मंदिर नागर शैली की वास्तुकला से बनी एक प्राचीन और नई संरचनाओं का समिश्रण है। इस मंदिर से प्राचीन विश्वकर्मा वास्तुशिल्पियों की कौशल श्रेष्ठता का पता चलता है। इस सुंदर मंदिर का शिखर नाना फड़नवीस द्वारा 18वीं सदी में बनाया गया था। कहा जाता है कि महान मराठा शासक शिवाजी ने इस मंदिर की पूजा के लिए कई तरह की सुविधाएं प्रदान की।

क्या कहता है पुरातन घंटा ?

नाना फड़नवीस द्वारा निर्मित हेमादपंथि की संरचना में बनाया गया एक बड़ा घंटा भीमशंकर की एक विशेषता है।
उत्सुकतावश हम घंटे की तरफ गए गये। वह घंटा महादेव गर्भगृह से ठीक सामने एक छोटे से शनि मंदिर पर लगा था। जाकर देखा तो उसपे चर्च का निशान और 1729 लिखा था,मन में उत्सुकता और बढ़ गई। शनि मंदिर के पुजारी जी से पूछने पर पता चला कि यह घंटा पेशवा कोकण क़िले के चर्च से पुर्तगालियों को हराकर लाए थे, लेकिन यह जानकारी पर्याप्त नहीं थी।
इसलिए हमने महान मराठा इतिहास के पुराने पीले पन्ने खोजे और पाया कि यह अद्भुत कुछ अलग सा दिखने वाला घंटा कोई मामूली घंटा नही अपितु महान हिंदू पराक्रम का प्रतीक है।

मंदिर के प्रांगण में स्थित शनि देव मंदिर के समक्ष लगा इतिहासिक घंटा

इसे पेशवा बाज़ीराव नही बल्कि उनके छोटे भाई वीर चिमाजी अप्पा जीतकर लाए थे।
और यह एक नही बल्कि ऐसे पाँच घंटे पुर्तगालियों की भुजाओं को कुचलकर, मराठा साम्राज्य की विजय के प्रतीक के रूप में महाराष्ट्र के पाँच विभिन्न मंदिर प्रांगणों में स्थापित किए गए। उन घंटों को “स्मारक एवं वीर स्मृति” रखने के लिए उन पर स्थित चर्च और सन बनाए रखा गया।

घंटे पर उकेरा गया क्रॉस का निशान

पता नही हमारी आने वाली पीढियां ऐसे हज़ारों गौरवशाली इतिहासों को जान भी पाएँगी या नही ?? या भंसाली जैसे फ़िल्मकारों द्वारा बनाई जा रही फटीचर इतिहास वाली घटिया फ़िल्मे हमारी आगामी पीढ़ी को भी विक्षिप्त कर देंगी !

 

नोट : भंसाली ने अपनी फ़िल्म में पुर्तगालियों को कुचलकर पाँच बार घंटे जीतकर लाने वाले महान चिमाजी अप्पा को “प्रेम के शत्रु और षड्यंत्रकारी” दिखाया था ! आज इस एक घंटे की वजह से एक महान वीर योद्धा, जिसे षड्यंत्रकारी दिखाया गया था का गौरवशाली इतिहास ऐसे उजागर कर दिया मानो घंटा स्वमः इस गौरवशाली इतिहास की गाथा सुनाता हो पर आमने ध्यान नही दिया।

ऐसे बहुत से इतिहास हैं जिन्हें एक षड्यंत्र के तहत या तो दुनिया से छुपा दिया गया ओरिया नष्ट कर दिया गया।

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