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कोमल मन

लेखिका (साधना सिंह स्वप्निल)
जूही अपनी बचपन की फ्रेंड सौम्या के घर गई डोरबेल बजा रही थी, पर दरवाजा कोई ना खोल रहा था, जूही कई बार डोर बेल बजाकर अब वापस लौटने ही वाली थी की तभी दरवाजा खुलता है… सामने सौम्या के बच्चों को देखकर मैंने पूछा ? सौम्या है। बच्चों ने पहले तो मेरा (अभिवादन किया,)पैर छुआ,फिर वह बड़े ही उदास स्वर में बोले मम्मी मार्केट गई है जूही मौसी,

मैं सौम्या के घर अक्सर आया जाया करती थी,बच्चे मुझे मौसी कह कर बुलाते थे, मैंने बच्चों को चॉकलेट दी और घर पर ही बैठकर सौम्या का इंतजार करने लगी, पहले तो बच्चे शांत थे फिर थोड़ी देर में मैं मैंने उनसे बोला कैरम ले आओ, कैरम खेलते हैं टाइम पास करने के लिए, उस समय मैंने बहुत ध्यान नहीं दिया कि बच्चे क्यों उदास थे ? बच्चे मेरे साथ खेलने लगते हैं और कैरम खेलने में खूब हो हल्ला होता है ऐसा लग रहा था कि मैं भी उन बच्चों के साथ बच्ची बन गई हूं, बच्चे चॉकलेट खा रहे थे और कैरम में एक दूसरे की खिचाई कर रहे थे, समय का पता ही नहीं लगा,

तभी दरवाजे पर डोरबेल फिर बजती है, बच्चे शांत हो जाते हैं, दरवाजा खोलने कोई ना उठता, मैंने बच्चों से कहा दरवाजा खोलो देखो शायद मम्मी होगी, निक्कू और सोनी में से कोई ना उठा, आखिर मैं ही उठी, मैंने दरवाजा खोला,सामने सौम्या थी, और वह मुझे देखते ही जोर से उछल पड़ी, अरे तू कब आई हम दोनों एक दूसरे को गले लग कर एक दूसरे से पूछ रहे थे, मैंने बोला मुझे आए बहुत देर हो गई मैं बच्चों के साथ कैरम खेल रही थी और तेरा इंतजार कर रही थी,

सौम्या बोली जूही तू बैठ मैं अभी तेरे लिए कुछ लेकर आती हूं फिर बैठकर ढेर सारी बातें करेंगे… तभी मेरा ध्यान बच्चों की ओर जाता है अरे तेरे बच्चे कहां चले गए,अभी तो मेरे साथ यहीं बैठे थे, सौम्या ने बड़ी बेपरवाही से बोला अपने कमरे में चले गए होंगे तू बैठ चिंता ना कर, आज मुझे सौम्या के घर में कुछ अजीब लग रहा था,बच्चों का यू शांत रहना डोर बेल का बजना,… दरवाजा ना खोलना….., आज तक जब भी मैं आती थी बच्चे बहुत ही खुश नजर आते थे, आज कुछ अजीब था मेरा मन यह मानने को तैयार नहीं था मैं कुछ सोचते हुए बच्चों के कमरे की तरफ बढ़ गई….,

बच्चों के कमरे के दरवाजे के पास पहुंचते ही मुझे अंदर से कानाफूसी की आवाज सुनाई देने लगी। सोनी निक्कू को बार-बार बोल रही है तू मम्मा पापा को बता दे…..पापा मम्मा कुछ नहीं बोलेंगे, पर निक्कू के मन में पता नहीं क्या चल रहा था वह रोए जा रहा था ,उसकी सिसकियो की आवाज दरवाजे तक मुझे सुनाई दे रही थी मैं बाहर खड़ी बहुत बेचैन हो गई,

मैं दरवाजा खोल कर अंदर जा पहुंची मुझे देखते ही निक्कू बाथरूम में भाग गया, मैंने सोनी से पूछा क्या बात है बेटा निक्कू को क्या हुआ है वह इतना क्यों रो रहा है सोनी अपना सर नीचे किए हुए खड़ी थी,मेरे बार बार पूछने पर भी वह कुछ ना बोल रही थी, तभी निक्कू बाथरूम से मुंह धो कर निकला, बड़े कॉन्फिडेंस में बोला कुछ नहीं हुआ हैं मासी मेरी आंख में कीड़ा चला गया था , पर उसकी इस बात पर मेरा मन नहीं मान रहा था,. निक्कू बेटा मुझे बता दो मैं सब संभाल लूंगी, वह फिर शांत हो गया और सर नीचे किए खड़ा रहा, जैसे उसकी सारी चोरी पकड़ी गई हो, मैंने निक्कू के सर पर हाथ प्यार से फेरा और उसको अपने कॉन्फिडेंस में लेने की कोशिश की, पर वह ट्स से मस ना हुआ, और सर नीचे करके दोनों बच्चे खड़े थे, मेरा मन किसी अनहोनी आशंका से ग्रसित होने लगा…। मैं बच्चों के कमरे से बाहर आ गई.।

सौम्या तब तक मेरे लिए चाय नाश्ता लेकर ड्राइंग रूम में आ गई थी , मैं सौम्या के साथ बैठकर चाय नाश्ता करने लगी….. मैं बैठी तो सौम्या के साथ थी पर मेरा मन बच्चों के पास लगा था. बातों बातों में मैंने सौम्या से कहा तेरे बच्चे बड़े प्यारे हैं, बहुत संस्कारी हैं और तेरी बातें भी बहुत सुनते हैं सौम्या अपने बच्चों की तारीफ को सुनकर बड़ी प्रफुल्लित हो रही थी अंदर से, फिर मैंने थोड़ा रुक कर कहा मेरे बच्चे तो बहुत बदमाश है इतना उत्पात मचाते हैं कि किसी बात की जिद कर दे तो बिना लिए नहीं मानते, गलत हो या सही, पर तुम ने अपने बच्चों को बहुत संस्कार से पाला है, वह दोनों तुम से डरते भी हैं, साम्या ने बड़े गौरव महसूस करते हुए मुझसे कहा हाँ बच्चे मुझसे डरते हैं, जब तक मैं या सचिन रहते हैं बच्चे कोई बदमाशी नहीं करते..। मुझे समझते देर ना लगी बच्चे सौम्या से और सचिन से बहुत डरते हैं….. तभी सौम्या फिर से बोली निक्कू अपनी क्लास में फर्स्ट आता है और सोनी भी फर्स्ट या सेकंड ही रहती है, इन दोनों की मजाल है कि कभी नंबर कम आए, मैंने फिर सौम्या की तारीफ की, वाकई तुमने अपने बच्चों को बहुत डिसिप्लिन से पाला है तुम्हारी रिस्पेक्ट करते हैं,।

सौम्या तेरा भी फर्ज बनता है कि बच्चों पर थोड़ा ध्यान दो,.. कि वे बिना डरे तुझ से अपनी बात कह पाए, तेरे बच्चे तुझ से बहुत डरते हैं,और मैंने सारी घटना उसको बता दी जब मैं आई थी और जब वह आई थी, बच्चे कैसे डरे सहमे हुए से थे आज, यह डर किसी रिस्पेक्ट का नहीं था यह डर उनको किसी बात से डरा रहा था, मैंने सौम्या से कहा बच्चों को डांटना नहीं चलो बच्चों के पास और उनसे प्यार से पूछो क्या बात है मैंने बच्चों से बहुत पूछा पर वह मुझे कुछ नहीं बता रहे,..

सौम्या ने भी मेरी बात का मान रखते हुए बच्चों की कमरे की ओर चल दी । मैंने सौम्या को धीरे से बच्चों के कमरे के बाहर ही रोक दिया. मैंने सौम्या को धीरे से बोला अंदर सुनो अभी भी कानाफूसी की आवाज आ रही थी और निक्कू अभी भी रो रहा था, यह सब सुनकर और देखकर अब सौम्या भी डर गई थी सौम्या ने बिना सोचे दरवाजा खोल दिया सौम्या के कमरे में पहुंचते ही निक्कू और सोनी दोनों सहम जाते, पर सौम्या ने बहुत समझदारी से काम लिया, मैंने भी सौम्या का धीरे से हाथ दबाया और कहने की कोशिश की जरा प्यार से काम ले,सौम्या ने भी मेरे हाथ को धीरे से दबाया जैसे कह रही हूं हां मैं समझ गई हूँ।…

सौम्या ने बड़े प्यार से निक्कू से पूछा बेटा बताओ क्या बात है मैं सब ठीक कर दूंगी पर निक्कू कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं था, सौम्या ने सोनी को पूछा क्या बात है बेटा भाई क्यों रो रहा है, मैं बड़े प्यार से दोनों के सर पे हाथ फेर रही थी पर दोनों बच्चे कुछ बोलने को तैयार ना थे, सौम्या के सब्र का बांध अब टूटता जा रहा था वह रोने लगती है, सोनी मां को रोता हुआ देख कर, वह बोलती है मां चुप हो जाओ मैं सब बताती हुँ.। निक्कू दौड़ के आता हैं और सोनी को मना करने लगता है पर सोनी सब बताना शुरू करती है जब सोनी बताने लगती है हम हमारे मुंह खुले और हम आवाक रह जाते हैं l

” आज भैया को नंबर कम मिले थे प्रिंसिपल ने पापा को बुलाया है प्रिंसिपल मैम ने निक्कू भैया को डाटा और बोला आजकल तुम्हारा मन पढ़ने में नहीं लग रहा, भैया डर गया था और वो रास्ते मे बोल रहा था अगर तुमने मम्मी या पापा को बताया तो मैं हारपिक़ पी कर अपनी जान दे दूँगा या घऱ छोड़कर कही चला जाऊंगा …भैया तो चला भी गया होता है अगर रिक्शा वाले भैया जल्दी ना आए होते तो.,…”

निक्कू अब और जोर जोर से रोने लगता है माँ पापा को मत बताना…. ,माँ पापा को मत बताना……सौम्या ने निक्कू को खींचकर गोदी में लिया प्यार से सहलाने लगी है…, और समझाने लगी बेटा हमेशा कोई फर्स्ट नहीं आ सकता कभी कोई आगे तो कभी कोई पीछे रहता है, जो हारता है वह दुगने उत्साह से जितने की कोशिश करता है यही तो मजा है जिंदगी का, मैं और पापा तुमसे बहुत प्यार करते हैं इसलिए नहीं कि तुम फर्स्ट आते थे, हम दोनों तुम दोनों से प्यार करते हैं बेटा तुम दोनों में हमारी जान बसती हैं…तुम हमारा स्वाभिमान हो,और तुममें बहुत अच्छे संस्कार है, तुम आज अगर डर से यह कदम उठा लेते और मौसी ना आई होती तो हमें पता भी नहीं चलता और हम दोनों जीते जी मर जाते,वह निक्कू और सोनी को चुमे जा रही थी, और रोती जा रही थी…।

मैं वहां एकदम स्टैचू बनी खड़ी थी और मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी डोर बेल बजी मेरा ध्यान भंग हुआ और मैं दरवाजा खोलने के लिए बढ़ी और दरवाजा खोला दरवाजे पर सचिन थे, मुझे देखते हुए बोले अरे जूही तुम कब आई,मैं चुप रही मैंने कोई जवाब ना दिया तब तक सचिन अंदर आ गए थे, अंदर आकर सचिन बोले क्या बात है बड़ा सन्नाटा है, सचिन को देखते ही निक्कू छुप जाता है सौम्या सचिन को इशारा करती है कमरे में चलने को, सचिन को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह कमरे में जाता है, सौम्या निक्कू को जूही के पास छोड़कर कमरे में जाती हैं सारी बात बताती है सचिन अपना सर पकड़ लेता है…

बच्चों के साथ दोस्ती का भी भाव रखना चाहिए, मां-बाप दोनों में से किसी एक के साथ बच्चों का घुलना मिलना बहुत जरूरी है, कम से कम बच्चे दिन भर की बातें आपसे बता सके बिना डरे…..। बच्चों का मन बहुत कोमल होता है वह छोटी सी बात पर डर जाते हैं यह कोमल मन नहीं जानता कि क्या गलत है क्या सही…. इसकी शिक्षा मां-बाप ही दे सकते हैं.. उन्हें अपने दिल से लगा कर रखें उनकी हर धड़कन की आवाज आपको सुनाई दे…..

Dsam

आज जुही के कारण सौम्या के बच्चों की जान बच गई थी…। सौम्या और सचिन दोनों ने जूही का बहुत आभार प्रकट किया।

लेखिका साधना सिंह -गोरखपुर

 

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