हिंदी दिवस पर विशेष – डॉ ए के पांडेय

देश और भाषा , भारतीय संस्कृति का होता लोप , कारण से अनजान कोई नही लेकिन ध्यान अपने देश पर नही ,, ये पीढ़ी कहाँ जाएगी
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14 सितंबर हिंदी दिवस पर मेरा एक पुराना लेख आप के लिए पुनः समर्पित है ।
सोचिए गौर कीजिए और हिंदी को राष्ट्र भाषा
बनाने पर जोर दीजिये अपनी गरिमा को सम्मान दिजीये 🌹💐🙏
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं , हिंदी एक अत्यंत समृद्ध भाषा है जिसके एक शब्द के 125 पर्यायवाची होते हैं मुझे गर्व है अपनी मातृभाषा पर
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आज लोगों के अंदर से आदर सम्मान आदि के भाव , भावनाएं विलुप्त हो रही हैं , पाश्चात्य रंग में रंगे सियार ही नज़र आते है ,
ताज़ातरीन उदाहरण रिया , और हत्प्राण सुशांत हैं , इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है भारतीयता को खत्म करने की , आज जिधर देखो ईसाइयत , अंग्रेजियत फैली है धर्मांतरण जोरों पर है ,
लेकिन कभी सोचा आपने ऐसा क्यों है ,
आइए अपने अल्पज्ञान से कुछ बताता हूँ , आसान भाषा मे समझिए इसे ।

इंग्लैंड का पहला कान्वेंट स्कूल 1609 के आसपास खोला गया , कारण नाजायज बच्चों का पालन पोषण , जिसके तथ्य मौजूद हैं ,
ये नाजायज बच्चे लिव इन रिलेशनशिप की पैदावार होते थे ,

1842 में भारत मे कलकत्ता में कान्वेंट खोला गया , लिव इन उस समय अंग्रेज भारत मे लांच कर चुके थे , उस समय इसे फ्री स्कूल कहा जाता था ,, इस प्रकार के स्कूल के लिए कानून भी बना , इसी कानून के अंतर्गत कलकत्ता यूनिवर्सिटी , बम्बई यूनिवर्सिटी , मद्रास यूनिवर्सिटी बनी ।

लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है ।
लेकिन दुनिया मे 204 देश हैं ,
सिर्फ 11 देशों में अंग्रेजी बोली जाती है ।
अंग्रेजी का उपयोग लोग रुतबा रुआब झाड़ने के लिए करते हैं ,
जिन्हें अपनी भाषा का ही ज्ञान न हो वो दूसरों पर क्या रुआब झाड़ेगा पता नही ,

अपनी भाषा का हम चीरहरण स्वयं करते हैं ।
ईसा मसीह और बाइबिल की भाषा अमरेक है ,, वो भी अंग्रेजी नही ,
शुरू में नाजायज बच्चों को पारिवारिक बोध के लिए कान्वेंट में , फादर , मदर , और एक सिस्टर होती थी जिससे उँन्हे लगे कि ये एक रिश्ता होता है ।

मैकाले के प्रसिद्ध पत्र के बारे में दुनिया जानती है ।

We must do our best to form a class who may be interpreters between us and the millions whom we govern a class of persons indian in blood and colour , but english in taste , in opinions , words and intellect “”
Macaulay 1835 .
अर्थात , भारत में लागू की गई शिक्षा पद्धति से पढ़ कर निकलने वाले विद्यार्थी रूप रंग खून और शरीर से भारतीय , और विचार एवम आचरण से अंग्रेज होंगे ।
200 वर्ष पहले मैकाले की कुत्सित विचार वाली शिक्षा पद्धति हम पर लागू है , और हम उसकी सोच को दिन प्रतिदिन बढ़ावा दे रहे हैं ,

  • और आज जिनके जायज माता पिता , भाई बहन हैं वो भी ,
    कॉन्वेंट जाते हैं , कितने शर्म की बात है ।
  • अतः अपनी मातृभाषा अपनी संस्कृति को सम्मान दें
  • जय हिंद , जय हिंदी 🌹🙏

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