केंद्र सहित विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा पदोन्नति में आरक्षण की मांग को लेकर चल रही सुनवाई के बीच SC/ST एक्ट को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा फैंसला

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SC/ST कानून के तहत केस को निरस्त कर सकती हैं अदालतें : सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सर्वोच्च न्यायालय की उक्त कार्यवाही जर्नल कैटेगरी के जख्मों पर मरहम : अभय कांत मिश्र

नई दिल्ली (विशेष सवांदाता विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया) देश मे पिछले 72 साल से राजनीतिक पार्टियों के षड्यंत्रों के चलते प्रताड़ित हो रहे सामान्य वर्ग को उस समय बड़ी राहत मिली जब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने SC/ST एक्ट पर टिप्पणी कर डाली।


सर्वोच्च न्यायालय का उक्त फैंसला उस समय आया जब केंद्र सहित विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा पदोन्नति में आरक्षण मांगने की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में जोरों शोरों से चल रही है।

यहां आपको बता दें कि देश की भाजपा शासित केंद्र सरकार सहित विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा वोट बैंक की राजनीति करते हुए पदोन्नति में आरक्षण मांग कर सामान्य वर्ग के लिए एक और नया फंदा तैयार किया जा रहा है। जिसमे सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा हेतु जानी जाती संस्था आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति आमने सामने की कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अगर किसी अदालत को लगता है कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज कोई अपराध मुख्य रूप से निजी या दीवानी का मामला है या पीड़ित की जाति देखकर नहीं किया गया है तो वह मामले की सुनवाई निरस्त करने की अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर सकती है।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “अदालतों को इस तथ्य का ध्यान रखना होगा कि उस अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 15, 17 और 21 में निहित संवैधानिक सुरक्षात्मक प्रावधानों के आलोक में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य था कमजोर वर्गों के सदस्यों का संरक्षण करना और जाति आधारित प्रताड़ना का शिकार हुए पीड़ितों को राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराना।”

पीठ ने कहा, “दूसरी तरफ अगर अदालत को लगता है कि सामने पेश हुए मामले में अपराध, भले ही एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया हो, फिर भी वह मुख्य रूप से निजी या दीवानी प्रकृति का है या जहां कथित अपराध पीड़ित की जाति देखकर नहीं किया गया हो, या जहां कानूनी कार्यवाही कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, ऐसे मामलों में अदालतें कार्यवाही को समाप्त करने की अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकती हैं।”

जब इस संदर्भ में ए जागरण 24×7 ने आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभय कांत मिश्रा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SC/ST एक्ट पर की गई टिप्पणी सामान्य वर्ग पर लगे जख्मों पर मरहम का काम करेगी, लेकिन जिस तरह 2018 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामान्य वर्ग की जीत के खिलाफ अध्यादेश ले आए थे ठीक उसी तरह इस बार भी कहीं नरेंद्र मोदी ही अध्यादेश ना ले आएं।

आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभय कांत मिश्रा

श्री मिश्रा ने कहा की काफी अर्से बाद सामान्य वर्ग के हित में यह एक शानदार फैसला है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए इस फैसले का सामन्यवर्ग की तरफ से जोरदार स्वागत किया।

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