सोचो साथ क्या गया और क्या मिला

दिल्ली/वाराणसी

दशकों तक आतंक का पर्याय बन फिर माफिया से सांसद तक सफर किया , एक

समय ऐसा भी था कि तुम्हारी वजह से बिहार छोड़ कर औद्योगिक घराने फरार होने लगे , डॉक्टर्स से लिए बिजनेस मैन

सब बिहार छोड़ने लगे ,

 

सोचो शहाबुद्दीन तुम्हे क्या मिला ।

 

  1. सिर्फ मौत

जिस मौत की दहशत से तुम सबको डराते रहे उसी मौत ने 10 दिन तक तड़पा कर तुम्हे निगल लिया ,

तमाम हत्याओं और अपहरण , सरकारी लूट से बना तुम्हारा तंत्र तुम्हारा आपराधिक साम्राज्य कुछ भी तुम्हारे काम न

आया , अपने माफियागिरी के दम पर , बंदूकों के दम पर तुम कुछ न कर पाए , धन दौलत औरत बच्चे कोई भी काम न

आया , उम्र कैद तुम्हारी उम्र भी ले गई ,

फिर इतना उल्टा सीधा कर तुम्हे मिला ही क्या , अब तुम्हारा सब कुछ छीन जाना है , समय सब छीन लेगा , तुम्हारा

परिवार तुम्हारा साम्राज्य सब यहीं रह गया , अब जनता जगह जगह से अपना वापस वसूलेगी , क्या फायदा हुआ ।

लेकिन कोई समझता नही इस बात को , मौत सबसे बड़ी सच्चाई है जो सबको निगलती है , तुम्हे भी निगल गई ।

मौत पर किसी के हँसना हमारी संस्कृति नही है इस लिए ॐ शांति ।

 

सबक दूसरे ले सकते हैं सोचो साथ क्या गया और क्या मिला ।

 

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